Tuesday, 27 January 2015

गरीबों, अभिवंचितों के उत्थान में विकास मित्र अपनी सकारात्मक भूमिका निभायें:- मुख्यमंत्री

 पटना, 26 जनवरी 2015:- जनतांत्रिक व्यवस्था में राष्ट्रीय पर्वों को मनाया जाना मात्र रस्म अदायगी नहीं होना चाहिये बल्कि इसे ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर समाज के सबसे गरीब लोगों को इससे जोड़ने से ही हम कह सकते हैं कि वास्तव में यहाॅ आजादी है, जम्हूरियत है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बहुत खूबसूरती से इस कार्य को अंजाम दिया है। महादलित टोलों में उस गांव के वयोवृद्ध व्यक्ति से झंडोतोलन कराये जाने से समाज के सबसे गरीब एवं नीचले पायदान पर रह रहे लोगों में आत्म-सम्मान एवं जागरूकता आई है। आज मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माॅझी पटना जिले के पुनपुन प्रखंड के बराह पंचायत के महादलित टोला में राष्ट्रीय ध्वज के झंडोतोलन कार्यक्रम के अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिहार के ऐसे हजारों टोलों में झंडा फहराया गया है। 38 महादलित टोलों में वहाॅ पर बिहार सरकार के मंत्री की उपस्थिति में झंडोतोलन किया गया है। ऐसे अवसरों पर पढे़-लिखे लोगों, सामाजिक कार्यकताओं की उपस्थिति से उस स्थान के लोगों को गणतंत्र की महत्ता से विशेषकर गरीबों, खासकर महादलित समुदाय के लोगों को समझाने का काम किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें आजादी मिली है, यहाॅ प्रजातंत्र है, जिसका अर्थ है कि सरकार द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं का लाभ गरीबों को मिले, कैसे वे इसका उपयोग करें लेकिन गरीबों को योजनाओं की समुचित जानकारी नहीं मिल पाती है। जब तक उन्हें बताया नहीं जायेगा, तब तक कैसे वे इसका लाभ ले पायेंगें। ज्यादा गरीबों की संख्या अनुसूचित जाति/जन जाति, पिछडा वर्ग, अति पिछडा वर्ग, अकलियत एवं सवर्ण सभी जगह है। जिन्हें कोई रास्ता बताने वाला है तो उसका वे लाभ ले लेते हंै। दलितों एवं महादलितों में कोई रास्ता बताने वाला नहीं था, इस उद्देष्य से विकास मित्रों को नियोजित किया गया है। उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण है, उनके मानदेय को बढाया गया है, साईकिल दी गई है ताकि वे घूम-घूम कर देखें कि इस समाज के लोगों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीष कुमार ने हमारे कहने पर ही महादलित आयोग बनाया और उसकी अनुषंसा पर विकास मित्रों को नियोजित किया गया ताकि वे अनुसूचित जाति के टोलो में जाकर देखें कि जरूरतमंदों का बी0पी0एल0 में नाम है या नहीं, इंदिरा आवास मिला है या नही, सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ मिला है या नहीं आदि सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और उनको योजनाओं का लाभ प्राप्त होने में सहयोग करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास मित्र, टोला स्वयं सेवक को उनके समाज के विकास के लिए लगाया गया है लेकिन अब तक विकास मित्रों द्वारा सकारात्मक भूमिका नहीं निभाई जा रही है, उनके कार्यो से निराषा हुई है। मुख्यमंत्री ने विकास मित्रों एवं टोला स्वयं सेवकों से कहा कि आपको घर में काम दिया गया है, उसका उपयोग समाज के हित में करें। जो समाज अनपढ़, अषिक्षित हैं, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने का कार्य करें। वे किसी आवेदन को लेकर किसी पदाधिकारी के पास जाते हंै, यदि संबंधित पदाधिकारी द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जाता है तो उक्त पदाधिकारी के विरूद्ध कारवाई की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीष कुमार ने जो काम किया है, आज तक किसी ने नहीं किया है, उन्हीं के पद चिन्हों पर चलने का काम कर रहे हंै। बिहार आगे बढ रहा है और आगे बढेगा। पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीष कुमार ने गरीबों, दलितांे एवं महादलितों को आगे बढ़ने का सपना दिखाने का काम किया है। उसी को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे है और उन्होंने जो विकास की रेखा खिंची है, उसी रेखा को आगे बढा रहे हैं। जन वितरण प्रणाली के दुकानों की अनुज्ञप्ति में आरक्षण दिया गया है, जितने भी परमिट एवं लाईसेंस के मामले हैं, उसमें आरक्षण देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी दुष्प्रचार मे नहीं जायंे। स्वयं निर्णय लें कि कौन गरीबांे के हित में काम कर रहा है। गरीबों के हित में जो काम बचा है, उसे पूरा करने का काम करेंगें। हम सेवक हैं, सेवा का मौका मिला है, सभी तबके के लोगों की सेवा करेंगे। सरकार जो लाभ दे रहीे है, लाभ लीजिये और अपना विकास कीजिये।
मुख्यमंत्री ने बराह से परसाहा तक ढाई किलोमीटर छूटे पथ को निर्माण कराने की घोषणा करते हुए कारवाई करने का निर्देष दिया। बराह पंचायत में किराये के भवन में चल रहे अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए कम से कम 30 डिसमिल भूमि उपलब्ध हो जाने पर वहाॅ अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बना देने की बात कही। मखदुमपुर उच्च विद्यालय को प्लस टू में उत्क्रमित करते हुए नये विद्यालय भवन का निर्माण कराये जाने की घोषणा  करते हुए इसके लिए कर्णांकित राषि दिए जाने की स्वीकृति प्रदान की। काॅमन कम्युनिटी हाॅल के निर्माण के लिए भी मुख्यमंत्री ने स्वीकृति प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने यहाॅ लघु जल आपूर्ति योजना स्वीकृत किए जाने की बात कही। मुख्यमंत्री आदर्ष ग्राम योजना के तहत बराह पंचायत को सम्मिलित किए जाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने किया। सम्पर्क पथों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए प्रक्रिया आरंभ कराये जाने की बात उन्होंने की। मुख्यमंत्री ने  इस क्षेत्र के विकास के लिए उद्योगों की स्थापना की मांग पर कहा कि यदि 30 से 50 एकड भूमि मिल जाती है तो यहाॅ पर उद्योग लगाने का प्रयास करेंगे।
इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री सह जिला प्रभारी मंत्री श्री विजय कुमार चैधरी ने कहा कि गरीब, ग्रामीण लोगों की सहभागिता के लिए राष्ट्रीय पर्व का त्योहार सबसे गरीब लोगों के बीच महादलित टोलों मे मनाया जा रहा है। इससे गणतंत्र का सम्मान बढा है, उॅचाई मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोई योजना तब तक सफल नहीं होगी, जब तक आपको लाभ नहीं मिलता है। अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से सुविधाएॅ दी जा रही है। उन्होंने लोगांे से अपील किया कि सरकार ने जिस मकसद से योजना को चलाया है, उसी मकसद में योजना से प्राप्त राषि को व्यय करें।
बराह महादलित टोला में उस टोला के सबसे वरिष्ठ नागरिक श्री नाथुन मांझी के द्वारा मुख्यमंत्री, जिला प्रभारी मंत्री, वरीय पदाधिकारियों, गणमान्य व्यक्तियों एवं वहाॅ के निवासियों की उपस्थिति में राष्ट्रीय ध्वज का झंडोत्तोलन किया गया। इस अवसर पर आयोजित समारोह मे मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं में लाभुकों का चेक प्रदान किया गया। पटना जिला में पहली बार परिवरिष योजना के अंतर्गत 47 अनाथ बच्चों को पेंषन राषि का लाभ दिया गया है। प्रतीक के रूप में शुभम कुमार एवं आषीष कुमार को लाभ दिया गया। पारिवारिक लाभ के अंतर्गत 20-20 हजार रूपये का चेक 24 व्यक्तियों को, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत पांच-पांच हजार रूपये की राषि छह लाभुकों को एवं सामाजिक सुरक्षा पेंषन का लाभ 15 व्यक्तियों को उपलब्ध कराया गया। जिलाधिकारी पटना श्री अभय कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। स्थानीय विद्यालय के छात्राओं द्वारा स्वागत गान की प्रस्तुती दी गयी। बराह पंचायत के मुखिया श्री अरविन्द कुमार सिंह, प्रखण्ड 20सूत्री अध्यक्ष श्री अंजनी कुमार सिंह, जिला जदयू अध्यक्ष श्री अशोक कुमार सिंह, राज्य महादलित आयोग के अध्यक्ष श्री उदय माॅझी ने भी सभा को संबोधित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अमृत लाल मीणा, वरीय पुलिस अधीक्षक श्री जीतेन्द्र राणा, राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य श्री सत्येन्द्र माॅझी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।


Monday, 26 January 2015

गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास पर गेट टुगेेदर कार्यक्रम का आयोजन हुआ

गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास पर गेट टुगेेदर कार्यक्रम का आयोजन हुआ


पटना, 26 जनवरी 2015:- आज शाम मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग में गणतंत्र दिवस के अवसर पर भव्य गेट टुगेदर कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें राज्य मंत्रिमण्डल के मंत्रीगण, विधायक, विधान पार्षद, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, न्यायविद् तथा बड़ी संख्या में सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। मुख्यमंत्री को गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें दी। मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माॅझी ने भी तमाम अतिथियों से उनके समक्ष जाकर उनका स्वागत किया और उनके अभिवादन को स्वीकार करते हुये उन्हें भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें दी। गेट टोगेदर कार्यक्रम लगभग तीन घंटे से अधिक समय तक चली।
गेट टुगेदर कार्यक्रम में भाग लेने वालों में अध्यक्ष बिहार विधानसभा श्री उदय नारायण चैधरी, जल संसाधन मंत्री श्री विजय कुमार चैधरी, कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री महाचन्द्र प्रसाद सिंह, कला, संस्कृति मंत्री श्री विनय बिहारी, मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त श्री एस0के0 नेगी, सदस्य राजस्व पर्षद श्री ए0के0 चैहान, पुलिस महानिदेशक श्री पी0के0 ठाकुर, पूर्व मुख्य सचिव श्री अशोक कुमार सिंह, अध्यक्ष बिहार लोक सेवा आयोग श्री के.0सी0 साहा, महादलित आयोग के अध्यक्ष श्री उदय माॅझी, विधायक यथा- श्री अनिल कुमार, श्री सुमित सिंह, श्री अरूण कुमार सिन्हा, श्री सतीश कुमार, श्रीमती उषा विद्यार्थी, विधान पार्षद यथा- श्री शिवप्रसन्न यादव, प्रो0 रामवचन राय, नाजिम इमारत-ए-शरिया एवं बिहार राज्य हज कमिटी मौलाना अनिसुर्रहमान कासमी, राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष श्री सी0पी0 सिन्हा, सदस्य श्री बागेश्वरी सिंह, प्रसिद्ध चिकित्सक यथा- डाॅ0 ए0ए0 हई, डाॅ0 एस0एन0 आर्य, निदेशक आई0जी0आई0एम0एस0, उपाध्यक्ष जमायते उलमा श्री हुस्न अहमद कादरी, पटना नगर निगम के मेयर श्री अफजल इमाम, अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग श्री नौशाद अहमद, सेवानिवृत भारतीय प्रशासनिक अधिकारी यथा- श्री राम उपदेश सिंह, श्री के0पी0 रमैया, श्री आशिक इब्राहिमी, अध्यक्ष जिला परिषद जहानाबाद श्रीमती संगीता सिंह, वरिष्ठ सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता यथा- श्री मुनेश्वर प्रसाद सिंह, पूर्व विधायक यथा- श्रीकृष्णनंदन वर्मा, श्री मुनीलाल यादव, पूर्व विधान पार्षद एवं सदस्य बिहार लोक सेवा आयोग श्री श्याम किशोर सिंह, सदस्य बिहार लेाक सेवा आयोग श्री शाहनबाज खाॅ, सामाजिक कार्यकर्ता यथा- श्री राजेन्द्र प्रसाद नट, डाॅ0 संजय यादव, श्री मुस्तकीम रंगरेज, गया जिला जदयू अध्यक्ष श्री अभय कुशवाहा, गया जिला नगर जदयू अध्यक्ष श्री राजू वर्णवाल सहित विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, अनेक पूर्व विधायक, पूर्व विधान पार्षद, वरिष्ठ सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ चिकित्सक, न्यायविद् एवं प्रबुद्ध नागरिकगण प्रमुख थे।



‘न्याय के साथ विकास’ राज्य सरकार की प्राथमिकता है, इसके कार्यान्वयन के लिये सुशासन का कार्यक्रम बनाया है:- मुख्यमंत्री

पटना, 26 जनवरी 2015:- मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माँझी ने आज 66वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक गाँधी मैदान में राष्ट्रीय झंडोतोलन किया तथा संयुक्त टुकड़ी की सलामी ली तथा निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्य एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई दी और निम्न अभिभाषण किया-
भाइयो, बहनो और प्यारे बच्चो,
अपने देश के 66वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आप-सभी को तथा बिहार की समस्त जनता को मैं हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।
आज ही के दिन अपने देष को गणतंत्र राज्य घोषित किया गया एवं संविधान को अपनाया गया था। इसी संविधान के माध्यम से संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव रखी गई तथा नागरिकों के लिए न्याय, समानता, धर्म-निरपेक्षता एवं गरिमामय जीवन की वैधानिक परिकल्पना की और यही हमारे मार्ग का प्रकाश स्तम्भ है, जिससे देश का चतुर्दिक विकास हो रहा है।
राज्य सरकार ने सुषासन तथा विकास के लिए सार्थक प्रयास किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है। ‘न्याय के साथ विकास’ राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है, जिसके कार्यान्वयन हेतु सरकार ने सुशासन के कार्यक्रम बनाये हैं। उन कार्यक्रमों के आधार पर राज्य सरकार की पिछले एक वर्ष की उपलब्धियाॅं उल्लेखनीय रही है।
राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए विधि व्यवस्था, कानून का राज, सामाजिक सद्भाव का माहौल अत्यंत आवश्यक है। सरकार के प्रयासो से राज्य में साम्प्रदायिक सद्भाव और सामाजिक सौहार्द्र का वातावरण बना है एवं सभी वर्गों-सम्प्रदायों के बीच पारस्परिक विश्वास, सामंजस्य एवं स्नेह की बदौलत बिहार की एक नई पहचान बनी है।
राज्य की विधि व्यवस्था सुदृढ़ रखने एवं कानून का राज बनाये रखने की दिशा में पुलिस के कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है और आवश्यकतानुसार उन्हें सभी संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे हैं। पुलिस के आधुनिकीकरण एवं प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि वे अपना काम पूरी मुश्तैदी के साथ कर सकें। संगठित अपराध पर कड़ाई से अंकुश लगाया गया है और अपराधों को उनके तार्किक अंत तक पहुॅंचाने के लिए अनेक कदम उठाये गये हैं। राज्य के विधि विज्ञान प्रयोगशाला को अत्याधुनिक संयंत्रों से सुदृढ़ किया गया है जिससे अनुसंधानकर्ताओं को संवेदनशील काण्डों में सटीक साक्ष्य संकलित करने में मदद मिल रही है। पुलिस के लिए आधारभूत संरचना के विकास पर बल दिया जा रहा है। गत वर्ष में पुलिस भवन निर्माण निगम द्वारा 209 भवनों का निर्माण पूर्ण किया गया है एवं 455 भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टाॅलरेंस की नीति रही है। इस दिषा में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई एवं आर्थिक अपराध इकाई के द्वारा भ्रष्टाचार उन्मूलन की दिशा में निरंतर कार्रवाई की जा रहीहै। साथ ही विभिन्न कानूनी प्रावधानों का उपयोग कर अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की मुहिम जारी है।
राज्य सरकार ने अपने विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्ययोजना के आकार में लगातार वृद्धि की है। राज्य का योजना उद्व्यय वर्ष 2013-14 में 34 हजार करोड़ रूपया था जिसे वर्ष 2014-15 में 57 हजार करोड़ रूपये से अधिक निर्धारित किया गया है। राज्य ने अपने आंतरिक संसाधन में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की है। राज्य का अपना कर राजस्व वर्ष 2013-14 में 19 हजार 9 सौ 60 करोड़ रूपये था। वर्ष 2014-15 में 25 हजार 6 सौ करोड़ रूपये से अधिक राजस्व का अनुमान किया गया है। राज्य सरकार का बजट आकार पहली बार वर्ष 2014-15 में एक लाख करोड़ रूपया का आंकड़ा पार किया है।
राज्य के समग्र विकास के लिए मानव विकास की अग्रणी भूमिका है। सभी वंचित वर्गों को स्कूल पहुँचाने, नये स्कूल खोलने, कक्षाओं की संख्या में वृद्धि करने, प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक विद्यालयों में उत्क्रमित करने, नामांकन में वृद्धि लाने एवं लड़के-लड़कियों के बीच शिक्षा की खाई को पाटने के लिए राज्य सरकार ने अनेक सफल प्रयास किये हैं। राज्य के शत-प्रतिषत बच्चे एवं बच्चियों का विद्यालयों में नामांकन सुनिष्चित करने के लिए प्राथमिक एवं माध्यमिक षिक्षा के क्षेत्र में पोषाक, साईकिल एवं छात्रवृŸिा योजनायंे काफी कारगर साबित हुई हंै। इन योजनाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। दिनांक
22.12.2014 से 13.01.2015 तक आयोजित राज्य समारोह में जिलावार निर्धारित कार्यक्रमानुसार पोशाक योजना, मुख्य मंत्री बालक/बालिका साईकिल योजना, प्रोत्साहन योजना एवं प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अन्तर्गत आच्छादित लाभुकों के बीच राशि का वितरण किया गया है।
हर पंचायत में एक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना के नीतिगत फैसले के आलोक में गत वर्ष 12 सौ 91 उच्च माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना कर शैक्षणिक सत्र प्रारंभ किया गया। इस वर्ष एक हजार नये उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है।
राज्य में उच्च तकनीकी एवं व्यवसायिक षिक्षा के विस्तार तथा इसकी गुणवत्ता सुनिष्चित करने के लिए सरकार ने अनेक राष्ट्रीय स्तर के विष्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं तकनीकी संस्थाओं की स्थापना की है और कई नये संस्थानों की स्थापना पर कार्य चल रहा है। इसी कड़ी में राज्य में आई0आई0एम0 के स्थापना हेतु मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के अंतर्गत 150 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। राज्य के हर प्रमंडल में एक इंजीनियरिंग काॅलेज, जिला में पाॅलिटेकनिक और सभी अनुमंडलों में औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान स्थापित करने के लक्ष्य के विरूद्ध ठोस प्रयास किये गये हंै।
स्वास्थ्य सेवाआंे को सभी तक पहुॅंचाने तथा इनकी गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य प्रणाली में संरचनात्मक एवं गुणात्मक सुधार किए हंै। इस दिषा में गाॅंव तथा शहर के लोगांे के प्राथमिक उपचार हेतु प्राथमिक तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों को सुदृढ़ किया गया है। अब सरकार, स्वास्थ्य क्षेत्र मे द्वितीय चरण के सुधार पर कार्य कर रही है। चरणवार सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सभी कार्य दिवसों पर 24 घंटे स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। गंभीर रोगों से पीडि़त रोगियों को सुपरस्पेशलिटी चिकित्सा राज्य में ही उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सभी छः चिकित्सा महाविद्यालयों में सुपरस्पेशलिटी विभागों के गठन की स्वीकृति दी गई है।
नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने एवं उनके स्वास्थ्य सेवा संबंधी आॅंकड़ों को संकलित करने के लिए राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक वाह्य कक्ष में मरीजों के निबंधन, दवा वितरण, रेडियोलाॅजी-पैथोलाॅजी जाॅंच की सुविधा इत्यादि हेतु कम्प्यूटरीकृत प्रणाली ‘‘संजीवनी’’ का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत अब तक ढाई करोड़ से अधिक मरीजों का पंजीयन किया गया है। राज्य में दिनांक 07 जनवरी, 2015 से नये ‘‘पेन्टावैलेन्ट वैक्सीन’’ को नियमित टीकाकरण के अंतर्गत शामिल किया गया है। इस वैक्सीन की तीन खुराक बच्चों को पाॅंच गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करेगी।
राज्य में उत्तम आधारभूत संरचना के विकास हेतु सरकार वचनबद्ध है। राज्य के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों को राज्य मुख्यालय तथा जिला मुख्यालयों से जोड़ने एवं लोगो के सुलभ आवागमन हेतु सड़कों और पुल-पुलियों का निर्माण लगातार जारी है। पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत राज्य उच्च पथांे एवं वृहत जिला पथांे के अनुरक्षण हेतु नीति बनाई गई है तथा इसके आधार पर 9 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों के अनुरक्षण की योजनाओं पर कार्य चल रहा है जिस पर 2 हजार 5 सौ करोड़ से अधिक राशि का व्यय होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों को संपर्कता प्रदान करने को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी के तहत वित्तीय वर्ष 2014-15 में 2 हजार 7 सौ 86 ग्रामीण पथ जिनकी कुल लंबाई 4 हजार 8 सौ 44 किलोमीटर है, के निर्माण हेतु प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इस पर 4 हजार 70 करोड़ रूपये का व्यय होगा। ग्रामीण पथों के अनुरक्षण हेतु नई नीति की स्वीकृति करा कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।
राज्य के प्रत्येक घर में चरणबद्ध तरीके से निजी शौचालय बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक गांव में समुचित स्वच्छता रहे। हम प्रत्येक गांव में स्वच्छताकर्मी की व्यवस्था करने पर विचार कर रहे हैं। सभी बसावटों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हम वचनबद्ध है। नये चापाकल गाड़ने और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने हेतु व्यापक कार्यक्रम चलाये जा रहे है।
विद्युत प्रक्षेत्र में सरकार ‘‘हमारा आधार ऊर्जस्वित बिहार’’ के मूलमंत्र पर कार्य कर रही है। राज्य बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना चाहता है और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उत्पादन, संचरण एवं वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण हेतु 8 हजार करोड़ से अधिक की योजनाओं पर काम चल रहा है।
राज्य की विद्युत संचरण प्रणाली की क्षमता बढ़कर तीन हजार मेगावाट हो गई है तथा अगले वर्ष तक इसे 4 हजार 5 सौ मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है। इस क्रम में राज्य में पहली बार अक्टूबर, 2014 में 2 हजार 8 सौ मेगावाट से अधिक बिजली आपूर्ति की गयी। सरकार के अथक प्रयासों का नतीजा है कि कांटी थर्मल पावर प्रोजेक्ट की 110 मेगावाट की दो यूनिट एवं बाढ़ की 660 मेगावाट की इकाइयों में बिजली उत्पादन प्रारंभ हो गई है। नवीनगर में 660 मेगावाट की तीन इकाइयों का निर्माण कार्य जारी है।
वर्तमान में जिला मुख्यालयों में औसतन 20 से 22 घंटे बिजली आपूर्ति करने का प्रयास किया जा रहा है और सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्याप्त बिजली आपूर्ति हेतु विषेष निदेष दिये हैं। ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम के तहत सभी विद्युतरहित गाॅवों के विद्युतीकरण की योजना की स्वीकृति दी जा चुकी है और इस पर काम भी प्रारंभ कर दिया गया है। हमने घोषणा की थी कि किसानों को कृषि कार्य हेतु विद्युत कनेक्शन के लिए विशेष अभियान चलाकर 6 माह में विद्युत कनेक्शन सुनिश्चित किया जाएगा। इस पर अमल करते हुए दिनांक 06 फरवरी से पूरे बिहार में शिविर लगाकर कृषकों को विद्युत कनेक्शन दिया जाएगा।
राज्य सरकार कृषि के विकास एवं किसानों की आर्थिक समृद्धि हेतु बहुआयामी द्वितीय कृषि रोड-मैप का चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वयन कर रही है। किसानों को गुणवŸाापूर्ण उपादान उपलब्ध कराना, उन्हें नई तकनीकों में प्रषिक्षित करना एवं प्रत्यक्षण कर उनकी क्षमता का संवर्द्धन करने की अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन इस कृषि रोड मैप के तहत किया जा रहा है। उचित तकनीक एवं प्रबंधन के साथ संसाधनों के उचित इस्तेमाल से अन्न, दलहन, तेलहन, फल, सब्जियाँ, ईख, जूट, मधु, मषरूम, दूध, मांस, अंडा एवं मछलियों के उत्पादन एवं उत्पादकता में उत्साहजनक परिणाम दिख रहे हैं जिसे हमने ‘इन्द्रधनुषी क्रान्ति’ का नाम दिया है। कृषि कैबिनेट द्वारा कृषि रोड मैप के कार्यक्रमों की निरंतर समीक्षा की जा रही है। राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा को राजेन्द्र केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय में परिवर्तित कराने के लिए हमने कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किया है।
गंगा नदी के जल का समुचित उपयोग राज्य के किसानों के हित मे हैं। इसके लिए चुनारगढ़ से लेकर मोकामा टाल तक एक उच्चस्तरीय नहर बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसे जल्द ही मूर्तरूप दिया जायेगा।
राज्य में ‘हरियाली मिषन‘ के अन्तर्गत कृषि वानिकी योजना, निजी पौधषाला योजना एवं वृक्ष संरक्षण योजनाओं का काम आगे बढ़ा है और इनमें लोगों की सहभागिता बढ़ी है। राज्य सरकार आने वाली पीढ़ी को हरित एवं खुषहाल बिहार देना चाहती है। सरकार के इन प्रयासों और लोगों की भागीदारी के फलस्वरूप राज्य का हरित आवरण, जो लगभग 9 प्रतिषत था, वह बढ़कर अब 12.86 प्रतिषत हो गया है। इसे 15 प्रतिशत पर पहुँचाने का लक्ष्य है।
राज्य सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2014-15 में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त किसानो को 300 रूपया प्रति क्विंटल की दर से बोनसदिया जा रहा हैइसके लिए पाॅच सौ करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।राज्य की खाद्यान्न भंडारण क्षमता की वृद्धि हेतु आवश्यक कदम उठाये गये हैं। बिहार राज्य खाद्य निगम के लिए 689 नये गोदामों का निर्माण पूर्ण किया गया है जिससे 5 लाख मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता की वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त पैक्स एवं व्यापार मंडलों में 2017 नये गोदामों का निर्माण कार्य पूर्ण कर 4.67 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता का सृजन किया गया।
मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अन्तर्गत राज्य के 534 प्रखंडों में, प्रति प्रखंड 5 की दर से, कुल 26 सौ 70 ग्रामों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित कराने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। इन आदर्श ग्रामों में सभी मूलभूत सुविधायें उपलब्ध कराने के साथ-साथ सरकार की सभी विकासात्मक एवं कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत आच्छादन योग्य लाभार्थियों के बीच सुनिश्चित किया जायेगा।
श्रमिकों के कल्याण हेतु उन्हें कामगार बोर्ड के माध्यम से पंजीकृत करने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। भवन निर्माण, औजार एवं साईकिल क्रय हेतु प्रत्येक पंजीकृत निर्माण कामगारों को 15 हजार रूपये अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
महादलित, दलित, अति पिछड़ों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के विकास हेतु विशेष योजनाआंे को तैयार कर उनका प्रभावकारी तरीके से क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षणकिया जा रहा है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए विद्यालय से महाविद्यालय स्तर तक की छात्रवृŸिा योजनाओं से गत वर्ष 37 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को लाभान्वित किया गया है।
बिहार महादलित विकास योजना के अन्तर्गत सर्वेक्षित कुल 2 लाख 46 हजार से अधिक वासरहित परिवारों में से 90 प्रतिशत परिवारों को वास भूमि उपलब्ध करायी गई है। बिहार महादलित विकास योजना का अगले 2 वर्षों के लिए अवधि विस्तार कर सर्वेक्षित महादलित परिवार को वास हेतु भूमि उपलब्ध कराने के लिए रैयती भूमि का क्रय न्यूनतम प्राक्कलित बाजार मूल्य दर पर करने का निर्णय लिया गया है। इस योजनान्तर्गत अब वास रहित महादलित परिवारों को तीन डिसमील के स्थान पर पाॅच डिसमील भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
इसी कड़ी में राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में कम से कम दस वर्षो से वास करने वाले अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के वैसे वास रहित परिवारों, जो शहरी बी0पी0एल0 की सूची में शामिल हो तथा उसके परिवार के किसी सदस्य के पास राज्य या राज्य के बाहर वास भूमि अथवा आवास उपलब्ध न हो, को भी वास भूमि उपलब्ध कराने संबंधी नीति की स्वीकृति दी गई है।
अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अल्पसंख्यक समुदाय की दशम वर्ग में द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण छात्र एवं छात्राओं को 8 हजार रूपये प्रति छात्र/छात्रा की दर से एवं इन्हीं वर्गों के बारहवीं में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण छात्राओं को 15 हजार रूपये प्रति छात्रा तथा द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण छात्राओं को 10 हजार रूपये प्रति छात्रा की दर से प्रोत्साहन छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने के निर्णय के तहत राशि उपलब्ध कराई जा रही है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आवासीय विद्यालयों में बच्चों के आवासन संख्या को 28 हजार से बढ़ाकर एक लाख किये जाने पर हम काम कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अन्य सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से कमजोर व्यक्तियों तथा छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन एवं सहायता प्रदान करने के लिए अम्बेदकर फाॅउण्डेशन, बिहार की स्थापना की है।
राज्य सरकार ने गरीबों को विषेष कर बी0पी0एल0 तथा अन्त्योदय के लाभुकांे को विचलन रहित एवं ससमय खाद्यान्न उपलब्ध कराने हेतु डोर स्टेप डिलिवरी योजना लागू किए हंै। लक्षित जन-वितरण प्रणाली के अन्र्तगत दुकानों की अनुज्ञप्ति आवंटन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग एवं पिछड़े वर्ग की महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है।
जुलाई 2014 के प्रभाव से राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम अन्तर्गत संचालित विभिन्न पेंषन योजनाओं तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी पेंषन योजनाओं में पेंषन की राषि प्रति माह 200 एवं 300 रूपये से बढ़ाकर 400 रूपये प्रतिमाह निर्धारित की है। वर्तमान में कुल 60 लाख 62 हजार लाभार्थी पेंशन योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।
अल्पसंख्यकों के चहुॅंमुखी विकास के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। प्रारंभ से ही राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास पर बल दिया है। मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत प्रारंभ से अब तक एक लाख से अधिक छात्र/छात्राएॅं लाभान्वित हुए हैं। अल्पसंख्यक छात्रावास योजनान्तर्गत अब तक अल्पसंख्यक छात्रों के लिए 27 छात्रावासों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक एवं आर्थिक उत्थान हेतु क्रियान्वित “मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक शिक्षा ऋण’’ योजना अंतर्गत अब तक अल्पसंख्यक छात्र/छात्राओं के बीच चार करोड़ रूपये से अधिक का ऋण एवं ‘‘मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार ऋण योजना” के माध्यम से अल्पसंख्यक युवक/युवतियों को स्वरोजगार हेतु लगभग 38 करोड़ रूपये का ऋण वितरण किया गया है। हज यात्रियों की सुविधा के लिए पटना की तर्ज पर गया में भी हज भवन का निर्माण किया जा रहा है। राज्य में साम्प्रदायिक सौहार्द के मद्देनजर कब्रिस्तान घेराबंदी की योजना चलाई जा रही है जिसके तहत अब तक 5 सौ 77 करोड़ रूपये व्यय कर 4 हजार 6 सौ 40 कब्र्रिस्तानों की घेराबंदी की जा चुकी है। हाल ही में हमने मौलाना मजहरूल हक अरबी फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पांच एकड़ जमीन निःशुल्क उपलब्ध करायी है।
सरकार वंचित वर्गों के उत्थान के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण के प्रति भी संवेदनशील है। महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनके विरूद्ध होने वाले भेद-भावों को दूर करने के लिए कई उपाय किए गये हैं। सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी सुनिष्चित हुई है। आरक्षण देकर जहाॅं एक ओर पंचायती राज, नगर निकाय एवं सहकारी समितियों में महिलाओं को भागीदारी मिली है वहीं दूसरी ओर षिक्षक एवं पुलिस की नियुक्तियों में आरक्षण प्रदान करने से महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। बिहार सैन्य पुलिस में महिला बटालियन की स्थापना की गई है। बिहार स्वाभिमान पुलिस बटालियन के नाम से एक अनुसूचित जनजाति महिला सशक्त बटालियन के गठन का निर्णय लिया गया है।
राज्य के सर्वांगीण विकास हेतु युवा वर्ग को शिक्षित होना आवश्यक है। अतः अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्र-छात्राओं एवं सभी वर्ग की छात्राओं के लिए उच्चतर शिक्षा (विश्वविद्यालय शिक्षा सहित) के लिए नामांकन एवं अन्य किसी प्रकार का शिक्षण शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस पर होने वाला व्यय को राज्य सरकार वहन करेगी।
औद्योगिक प्रोत्साहन नीति, 2011 की मध्यावधि समीक्षा के आलोक में अनेक नये संशोधन, समावेश एवं परिवर्तन की स्वीकृति दी गई है। राज्य में अब तक 272 औद्योगिक इकाइयाँ उत्पादन में आ चुकी हैं एवं 176 औद्योगिक इकाइयों का स्थापना कार्य अंतिम चरण में हैै।खाद्य प्रसंस्करण, कृषि यंत्र उद्योग एवं सूचना प्रावैधिकी उद्योग को थ्रस्ट एरिया मानते हुए प्रोत्साहन हेतु विषिष्ट नीतियाॅं बनाई गई है। सिंगल विंडो क्लियरेंस की व्यवस्था को मूर्त रूप देने का काम चल रहा है। राज्य में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने तथा अड़चनों को दूर करने हेतु सरकार ने उद्योग संबंधी मंत्रीपरिषदीय समिति का गठन किया है।  
राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। श्रमिकों के हितों की रक्षा तथा खुली अर्थव्यवस्था एवं वैश्विक श्रम बाजारों की बदलती अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में ’’दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान’’ पटना में स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह संस्थान श्रम एवं नियोजन से जुड़े मुद्दों पर अध्ययन, शोध एवं मुल्यांकन एवं प्रशिक्षण का कार्य करेगी।
आधुनिक विकास के साथ-साथ सरकार अपनी समृद्ध विरासत को भी संजोने का प्रयास कर रही है। राज्य के धरोहरों को प्रदर्षित करने हेतु पटना में अंतर्राष्ट्रीय मानक के बिहार संग्रहालय का निर्माण तेजी से चल रहा है। बिहार में धार्मिक धरोहरों को संज्ञान में लेते हुए धार्मिक पर्यटन के कल्पना के तहत बौद्ध सर्किट, जैन सर्किट, रामायण सर्किट, सूफी सर्किट का विकास किया जा रहा है। पटना में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सह-ज्ञान भवन, 5 हजार की क्षमता वाला आडोटोरियम तथा सभ्यता द्वार का निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है।
सरकार के प्रषासनिक एवं नवाचारी नीतियों की बदौलत आज राज्य में साम्प्रदायिक सद््भाव, सामाजिक समरसता एवं शांति का माहौलबना है।सभी चुनौतियों के बावजूद राज्य प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। सरकार की कामना है कि समाज में सद्भाव एवं भाईचारा का वातावरण कायम रहे और बिहार भी विकसित राज्यों की कतार में खड़ा हो। गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर मैं आप सबको आह्वाहन करता हूँ कि बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए आप अपना भरपूर सहयोग दें। गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक बार पुनः आप सबको अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत कुल तेरह झाँकियों को भी देखा और उनमें दर्शायी गयी कलात्मक एवं शिक्षाप्रद ज्ञानों की प्रशंसा की।
इसके पूर्व मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माँझी ने शहीद-ए-कारगिल स्थल पर जाकर कारगिल के अमर शहीदों को नमन किया और उन्हें सपुष्प श्रद्धांजलि अर्पित की।



राज्य स्वास्थ्य समिति की झांकी को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किये जाने का निर्णय लिया गया

पटना, 26 जनवरी 2015:- आज 66वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर पटना के ऐतिहासिक गाॅधी मैदान में राष्ट्रीय झंडोतोलन, संयुक्त टुकडि़यों के मार्चपास्ट के पश्चात विभिन्न विभागों की कुल तेरह झांकियाॅ निकाली गयी। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, कला, संस्कृति एवं युवा कार्य विभाग, उद्योग विभाग, समाज कल्याण विभाग, बिहार राज्य महादलित विकास मिशन, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार शिक्षा परियोजना, कृषि विभाग, पर्यटन विभाग, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग एवं बिहार पुलिस की आकर्षक झांकियाॅ प्रस्तुत की गयी। प्रस्तुत झांकियों के माध्यम से न्याय सबके लिये, बुद्ध सम्यक् दर्शन संग्रहालय, बिहार में महिला उद्यमिता, विकासशील बिहार का आधार, सामाजिक सुरक्षा, सुपोषित परिवार, महादलित समुदाय के लिये रेडियो योजना, स्वस्थ शिशु, स्वस्थ बिहार-समृद्ध बिहार, समावेशी विद्यालय, संरक्षित खेती, मंदार पर्वत, पर्यटकीय गंतव्य, आर्यभट्ट, हमारा गाॅव, हमारी योजना, डिजास्टर मैनेजमेंट एवं पुलिस की सर्तकता इत्यादि को कलात्मक ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा। मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माॅझी ने भी झांकियों की बारिकियों को ध्यान से देखा तथा प्रस्तुत झांकियों की प्रशंसा की।
निर्णायकों ने राज्य स्वास्थ्य समिति की झांकी को प्रथम पुरस्कार, उद्योग विभाग की झांकी को द्वितीय पुरस्कार एवं बिहार पुलिस की झांकी को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया। इस अवसर पर उत्कृष्ट सेवा एवं अद्म्य साहस का परिचय देने के लिये सेना के अधिकारियों को भी मुख्यमंत्री ने पुरस्कार एवं नगद राशि से सम्मानित किया। इस अवसर पर आकर्षक संयुक्त परेड का मार्चपास्ट हुआ। निर्णायकों ने मार्चपास्ट में सम्मिलित उत्कृष्ट टुकडि़यों का चयन कर उन्हें पुरस्कृत किये जाने का निर्णय सुनाया।


मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर झंडोतोलन किया, बच्चों को मिठाइयाँ खिलाई

पटना, 26 जनवरी 2015:- मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माँझी ने आज सुबह 66वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने आवास 1 अणे मार्ग में राष्ट्रीय ध्वज फहराया, संयुक्त टूकड़ी की सलामी ली। बच्चों के बीच मिठइयाँ बाँटी, बच्चों ने भी मुख्यमंत्री को अपने हाथों से मिठाइयाँ खिलाई। मुख्यमंत्री का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अमृत लाल मीणा, सचिव श्री अतीश चन्द्रा, ए0डी0जी0 विशेष शाखा श्री सुनील कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी यथा- श्री धर्मेन्द्र कुमार, श्री गोपाल सिंह सहित अनेक वरीय प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को गणतंत्र दिवस की शुभकामना देते हुये उनसे कहा कि वे स्वयं शिक्षित हों, अपने पास-पड़ोंस में भी शिक्षा के दीप को जलायें। आपका कोई साथी निरक्षर न रहे, इसके लिये प्रयासरत रहें। जो कुछ कर सकते हों, करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के महापुरूषों से सीख लें और राज्य एवं राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनने के लिये बेहतर से बेहतर शिक्षा ग्रहण करें, चरित्रवान बनें।


खेती में जब तक किसानों की स्थिति ठीक नहीं होगी, तब तक मजदूरों की स्थिति ठीक नहीं होगी:- मुख्यमंत्री

पटना, 25 जनवरी 2015:- खेती में जब तक किसानों की स्थिति ठीक नहीं होगी, तब तक मजदूरों की स्थिति ठीक नहीं होगी। कृषि को लाभप्रद बनाये जाने के लिये राज्य सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। कृषि रोडमैप के माध्यम से कृषि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिये कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा पर विशेष बल दिया जा रहा है। पिछले छह वर्षों में राज्य में एक नये कृषि विश्वविद्यालय, चार नये कृषि महाविद्यालय तथा एक नये उद्यान महाविद्यालय की स्थापना की गयी है। कृषि क्षेत्र में विज्ञान के सतत् प्रयोग से ही किसानों की हालत में सुधार किया जा सकता है। देश में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा में विज्ञान के प्रयोग की प्रथम शुरूआत 1905 में पूसा से शुरू हुयी थी। 1934 के विनाशकारी भूकम्प के बाद सन् 1936 में कृषि अनुसंधान संस्थान दिल्ली चला गया, फिर भी इस संस्थान ने पूसा से अपने लगाव को कायम रखा। पुनः आज भारत सरकार इस संस्थान को अपना रही है, यह एक महज संयोग नहीं हो सकता बल्कि पूरे देश के खाद्य सुरक्षा के लिये बिहार के किसानों की महती भूमिका के लिये आवश्यक है। बिहार को दूसरे हरित क्रांति की धूरी के रूप में विकसित करने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माॅझी आज मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद सभाकक्ष में राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय का राजेन्द्र केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय में सम्परिवर्तन के लिये समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माॅझी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह तथा कृषि मंत्री बिहार श्री नरेन्द्र सिंह की उपस्थिति में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री विजय प्रकाश एवं महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान डाॅ0 अध्यपन ने समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर कर इसका आदान-प्रदान कर किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसके लिये वर्ष 2008 से भारत सरकार से अनुरोध कर रही थी, इसी कड़ी में आज का दिन बिहार और विश्वविद्यालय के इतिहास में मील के पत्थर के रूप में जाना जायेगा। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि भारत सरकार शीघ्र ही इस विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय के रूप में अंगीकार करेगी। उन्होंने कहा कि खेती महंगी होती जा रही है, इसका उपाय वैज्ञानिकों को करना होगा। हमने जैविक खाद, हरे खाद पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाली पीढ़ी हम सब पर उंगली उठायेगी। बढ़ती जनसंख्या के भार को सहन करने तथा बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिये हमें कृषि अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि आज हम जो कुछ भी इस्तेमाल कर रहे हैं, वह कहीं न कहीं प्रदूषित हो रही है। परंपरागत कृषि पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार का संकल्प मिट रहा है, जिस कारण जमीन का स्वरूप भी बदल रहा है। 20 प्रतिशत से अधिक लोग किसान कहलाने के रूप में नहीं हैं। अधिकांश लोगों के पास एक, दो, पाॅच एकड़ जमीन रह गये हैं, वे मजदूर के रूप में कृषि में आ गये हैं। कृषि ऐसी विधा है, जिसके माध्यम से उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है, हरित क्रांति लायी जा सकती है तथा लोगों की आय में वृद्धि की जा सकती है। बढती जनसंख्या के लिए भोजन की व्यवस्था की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि का बजट 2005-06 में एक सौ करोड़ रूपये का था, जो 2014-15 में बढ़कर 2700 करोड़ रूपये का हो गया है। कृषि रोडमैप पर डेढ़ लाख करोड़ रूपये लगभग खर्च करने की योजना है। वर्ष 2022 तक के लिये कृषि रोडमैप बनाया है। इस साल 126 लाख टन धान के उत्पादन का अनुमान है। उत्कृष्ट उत्पादन के लिये राज्य को दो बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिल चुका है। राज्य सरकार कृषि संस्थानों के निर्माण पर दो हजार करोड़ रूपये खर्च कर रही है। कृषि स्नातकों के लिये रोजगार के अवसर बढ़ाये जा रहे हैं तथा वर्ष 1989-90 के बाद पहली बार 417 कृषि पदाधिकारी की बहाली की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समेकित कृषि प्रणाली अनुसंधान केन्द्र, पिपराकोठी को 25 एकड़, इन्स्टीच्यूट आॅफ शुगर केन माधोपुर, पश्चिमी चम्पारण को 77 एकड़, केला अनुसंधान संस्थान गोरौल वैशाली को 25 एकड़, कृषि विज्ञान केन्द्र खिजिरसराय गया, सुखेत मधुबनी, लादा समस्तीपुर, तुर्की मुजफ्फरपुर, परसौनी पूर्वी चम्पारण, नरकटियागंज, पश्चिमी चम्पारण को 25- 25 एकड़ भूमि दी गयी है।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय कृषि मंत्री से माॅग की कि सारण प्रमण्डल में कृषि इंजीनियरिंग महाविद्यालय की स्थापना केन्द्रीय विश्वविद्यालय के अन्तर्गत करायी जाय। 15 प्रखण्डों से अधिक वाले अवशेष ग्यारह जिलों में भी कृषि विज्ञान केन्द्र खोले जायें, राज्य सरकार इसके लिये जमीन सुलभ करायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल डेयरी रिसर्च इन्स्टीच्यूट की स्थापना तथा फिसरिज रिसर्च एवं टेªनिंग सेन्टर हेतु भी राज्य सरकार भूमि सुलभ करायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के बनने के बाद बिहार के किसानों की अपेक्षा बढ़ जायेगी। संस्थान को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय अनुभव का लाभ मिलेगा। कृषि के सामने अत्यधिक चुनौतियाॅ हैं। छोटे-छोटे किसानों के लिये तकनिक विकसित करने की आवश्यकता है। मौसम में लगातार बदलाव आ रहा है, इससे भी खेती प्रभावित हेाती है। उम्मीद है कि केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से अत्याधुनिक तकनिक का लाभ बिहार के किसानों को मिलेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 27 हजार करोड़ रूपये भारत सरकार से राज्य सरकार को आना था, मगर मात्र 14 हजार करोड़ रूपये आये हैं। तेरह हजार करोड़ रूपये आना बाकी है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा एन0एच0 सड़कों के रख-रखाव पर हुये खर्च एक हजार करोड़ रूपये को दिलाये जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने नालंदा को वल्र्ड हेरिटेज में शामिल करने के लिये यूनेस्को को प्रस्ताव भेजने के लिये केन्द्र सरकार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि केन्द्र सरकार बिहार को आवश्यक मदद करेगी।
केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति तक देश में सर्वाधिक कृषि उत्पादकता बिहार में थी। बिहार में कृषि शिक्षा को बढ़ाने के लिये राज्य में एक पूर्णरूपेण कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की माॅग काफी समय से की जा रही है। वर्तमान राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा को केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय में स्थानांतरित किये जाने का विचार था। 2009 में बिहार सरकार द्वारा इस प्रस्ताव की पहल की गयी तथा बिहार में केन्द्रीय विश्वविद्यालय के इस प्रस्ताव पर योजना आयोग द्वारा अपनी सैद्धांतिक सहमति दी गयी। राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के तहत पाॅच महाविद्यालय, सात अनुसंधान संस्थान, ग्यारह कृषि विज्ञान केन्द्र कार्यरत हैं। प्रस्तावित केन्द्रीय विश्वविद्यालय एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर का क्षेत्राधिकार सम्पूर्ण बिहार होगा। 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इस केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के लिये कुल चार सौ करोड़ रूपये का प्रावधान किये जाने का प्रस्ताव किया गया है।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में पूर्णरूपेण केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु त्वरित कार्रवाई को सुनिश्चित करने के लिये कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संबंधित अधिकारियों के साथ केन्द्रीय कृषि मंत्री द्वारा समझौता ज्ञापन पर औपचारिक हस्ताक्षर करने के लिये आज यह बैठक मुख्यमंत्री के साथ पटना में की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल निश्चित रूप से बिहार की जनता के लिये वरदान साबित होगी और इससे देश भर में विशेषकर बिहार में समृद्धि आयेगी। बिहार राज्य में प्रोद्यौगिकी एवं मानव संसाधन विकास के लिये एक नये युग का सूत्रपात होगा, जिससे राज्य के सामान्यतः छोटे एवं गरीब किसानों के जीवन में खुशहाली आयेगी।
कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि आज का दिन कृषि के लिये ऐतिहासिक दिन है। बिहार में ही कृषि को वैज्ञानिक बनाने की बुनियाद पड़ी थी। बिहार में एक नया कृषि विश्वविद्यालय सबौर में स्थापित किया गया है। कृषि को महत्वपूर्ण रूप में जाना जाता है। राज्य सरकार कृषि पर विशेष ध्यान दे रही है। वर्ष 2017-22 तक का कृषि रोडमैप बना लिया गया है, कृषि कैबिनेट बनाया है। कृषि क्षेत्र में विकास से देश का विकास होगा। उन्होंने केन्द्रीय कृषि मंत्री से अनुरोध किया कि वे कृषि क्षेत्र के लिये अधिक से अधिक धन राज्य को मुहैया करायें। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों को मजबूत कीजिये। बिहार में लीची एवं मखाना क्षेत्र को बढ़ावा दिलाइये। गन्ना अनुसंधान केन्द्र यहाॅ पर स्थापित हो जाय तो चीनी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हो सकती है। यहाॅ की मिट्टी उवर्रक है। कृषि उत्पादन के प्रोसेसिंग क्षेत्र में उद्योग को यहाॅ लाने में मदद करें, आपके पहल की हम अपेक्षा रखते हैं।
इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त श्री विजय प्रकाश ने स्वागत भाषण किया, जबकि कुलपति राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय श्री आर0के0 मितल ने राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पर आधारित एक वृतचित्र की प्रस्तुती की। इस अवसर पर विकास आयुक्त श्री एस0के0 नेगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अमृत लाल मीणा, कृषि निदेशक श्री धर्मेन्द्र सिंह, निदेशक उद्यान श्री अमरेन्द्र सिंह सहित अनेक कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे।


चरणबद्ध रूप से राज्य के सभी प्राथमिक विद्यालयों में एक-एक उर्दू शिक्षक की नियुक्ति की जायेगी:- मुख्यमंत्री

पटना, 25 जनवरी 2015:- उर्दू राज्य की दूसरी राजभाषा है, इसको इज्जत मिले। उर्दू पढ़ने वाले हिन्दी जाने एवं हिन्दी पढ़ने वाले उर्दू जानें। दोनों भाषाओं को सीखना बहुत जरूरी है, उर्दू मधुर भाषा है। जिस विद्यालय में दस बच्चे उर्दू पढ़ने वाले होंगे वहाॅ पर उर्दू शिक्षक की बहाली करने का पूर्व में प्रावधान था, मगर मैंने निर्णय लिया है कि राज्य के सभी विद्यालयों में एक-एक उर्दू शिक्षक नियुक्त करेंगे। प्रथम चरण में अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाके के विद्यालयों में उर्दू शिक्षक भरे जायेंगे। आज दोपहर मुख्यमंत्री श्री जीतन राम माॅझी इमरत-ए-शरिया फुलवारीशरीफ में आयोजित तालिमी इजलास के अन्तर्गत ‘अल्पसंख्यकों की शैक्षणिक समस्यायें एवं समाधान’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुये महती जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन बिहार के इतिहास के लिये अत्यंत प्रमुख ऐतिहासिक दिन माना जायेगा। बिहार में दो केन्द्रीय विश्वविद्यालय यथा- मोतिहारी एवं गया में खुले हैं। तीसरा कृषि जगत में एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय खोले जाने के लिये केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने इस काम को प्रारंभ किया था। उन्होंने बिहार को आगे बढ़ाने के लिये कोई प्रयत्न नहीं छोड़ रखा था। उन्होंने ही हमें नामित कर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया, हम उनके कामों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी काम को दस प्वाइंट तक करना है और सात प्वाइंट तक हो चुका है, शेष तीन प्वाइंट छूटे काम को पूरा करना है। ऐसी स्थिति में छूटे कामों को पूरा नहीं करने वालों को नकारा कहा जायेगा। मैं पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के सभी कार्य को आगे बढ़ाने में लगा हुआ हूॅ। 2008 से राजेन्द्र कृषि महाविद्यालय को राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय में सम्परिवर्तन की बात चल रही थी। मामूली काम के लिये यह काम रूका हुआ था। जब ये बातें मेरे संज्ञान में आयी तो मैंने निर्देश दिया कि सभी समस्याओं का निदान तुरंत होना चाहिये। समाधान निकाला गया और सारी अड़चने समाप्त हुयी। भारत सरकार को हमारी बात माननी पड़ी और आज केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये केन्द्रीय कृषि मंत्री की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर हुआ।
मुख्यमंत्री ने अमिर-ए-शरियत हजतर मौलाना निजामुद्दीन साहब के प्रति सम्मान प्रकट करते हुये कहा कि हम आप जैसे लोगों से सीख लेते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में 73 हजार प्राथमिक विद्यालय हैं। लगभग 18 हजार उच्च एवं मध्य विद्यालय हैं। हमने निर्णय लिया है कि हर पंचायत में एक प्लस टू उच्च विद्यालय खोलेंगे। ऐसा कैटेरिया बना दिया है, जिसके तहत हर पंचायत में कम से कम एक उच्च विद्यालय अवश्य खुलेंगे। 1700 उच्च विद्यालय बनाये जा चुके हैं और शेष पंचायतों में उच्च विद्यालय बनाये जाने की प्रक्रिया चल रही है। सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर बच्चियों के लिये अलग विद्यालय की व्यवस्था कर रहे हैं, जहाॅ पर बालिका विद्यालय नहीं है, वहाॅ पर प्रोजेक्ट विद्यालय के तर्ज पर विद्यालय खोल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी एवं निजी क्षेत्र के विद्यालयों के कार्य प्रणाली में अंतर क्यों है, जबकि प्राइवेट स्कूल से कहीं ज्यादा सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को सुविधायें दे रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों का दोहन हो रहा है, उन्हें बहुत कम पैसे पर काम करना पड़ता है। सरकारी विद्यालयों के नियोजित शिक्षकों को भी हमने सुविधा दे रखी है। उनकी सेवानिवृति की आयु को साठ साल कर दिया है तथा उनके वेतन में वृद्धि कर दिया है। हम सबकी माॅगों को पूरा करना चाहते हैं, मगर हमारा हाथ बंधा हुआ है। भारत सरकार से वह सहयोग नहीं मिल रहा है, जो मिलना चाहिये। उन्होंने शिक्षकों से विशेष रूप से अनुरोध किया कि उन्हें जो सुख, सुविधा मिल रही है, उसके अनुसार रिजल्ट दें। पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने विभिन्न तरह के पदों पर नियोजन का मौका युवकों को दिया था। उन्हें घर के निकट ही बच्चों को पढ़ाकर अपनी योग्यता को बढ़ाने का अवसर दिया ताकि वे अपने कार्यों के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को भी जारी रख सकें, अपनी योग्यता को बढ़ा सकें और ऊॅची से ऊॅची नौकरी पायें, मगर अफसोस है, ऐसा नहीं हुआ। नियोजित शिक्षक अपनी योग्यता बढ़ाने के विरूद्ध हड़ताली मोड़ पर अपनी माॅगों को पूरा कराने के लिये नारा लगाने में समय बीता रहे हैं। पहले शिक्षक पढ़ते थे और पढ़ाते थे। बच्चों को अनुशासन सीखाते थे। जरूरत है कि आज शिक्षकगण अपनी इस पुरानी परंपरा का निर्बाह करें और खोई हुये गरिमा को वापस लायें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोग गाॅवों को भूलकर शहरों में रहने लगे हैं। अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं। स्कूल में जो पढ़ाई होती थी, उसी के बल पर वे आज इस स्थान पर पहुॅचे हैं।
मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों की चर्चा करते हुये कहा कि चिकित्सक देहात में रहना पसंद नहीं करते इसलिये मैंने सोंचा है कि अब जो भी चिकित्सकों की नई बहाली होगी, उसमें यह शर्त रखेंगे कि उन्हें पाॅच वर्षों तक देहात में रहकर सेवा देनी होगी, तभी उन्हें शहर में पदस्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि गाॅवों में पदस्थापित चिकित्सक पटना से जायेंगे तो वे क्या सेवा कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के प्रबुद्ध लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझें और इनकलाब का नारा लगाने वालों को समझायें, उन्हें काम करने की सलाह दें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौलाना मजहरूलहक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के लिये पाॅच एकड़ जमीन एवं 65 लाख रूपये दे दिया है, जिस राशि या अन्य जरूरतों को पूरा करने की जो आवश्यकता होगी, वह भी वे पूरा कराने पर ध्यान देंगे। उर्दू अकादमी, मदरसा बोड सबको अपनी जमीन हो, इसके लिये भी बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यकों की स्थिति इतनी खराब क्यों है, इसका भी अध्ययन कराया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड, शिया वक्फ बोर्ड के पास हजारो एकड़ जमीन है। अगर इसका प्रबंधन ठीक हो जाय तो अकिलियत समाज के लोगों को मदद के लिये सरकार की ओर नहीं देखना होगा बल्कि वे सरकार की मदद कर सकेंगे। जब तक मेरे पास समय है, मैं बोर्डों की संपति का बेहतर प्रबंधन करने की कोशिश करूॅगा।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा किया कि इमारत-ए-शरिया के प्रांगण में काॅन्फ्रेंस हाॅल बनाने के लिये वे राशि सुलभ करायेंगे। उन्होंने अमिर-ए-शरियत से अनुरोध किया कि वे इसके लिये प्राक्कलन एवं अन्य औपचारिकतायें पूरी करायें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबको एक मानकर चलते हैं। हम सभी एक हैं, हम सबको भगवान, खुदा के पास पहुॅचना है। पहुॅचने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, मगर मंजिल हम सबकी एक ही है। हम सभी धर्म का सम्मान एवं आदर करते हैं। मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरपुर के अजीजपुर में हुयी घटना का जिक्र करते हुये कहा कि वहाॅ के लोगों का दोष नहीं। शैल देवी ने अपनी जान को जोखिम में डालकर दस मुसलमानों की जान बचायी, सबको पनाह दिया। हिन्दुओं ने भी मुसलमानों को अपने घर में पनाह दी और उन्हें बचाया। उन्होंने कहा कि उक्त घटना में साजिश का गंध आ रहा है। कैसे-कैसे लोग वहाॅ गाड़ी से आये थे। हम साजिश को नहीं चलने देंगे। जैसे ही घटना की सूचना मुझे मिली, मैंने अपनी मुम्बई यात्रा को बीच में ही छोड़कर तथा प्रधानमंत्री जी से मुलाकात के समय को छोड़कर पटना लौटे और पीडि़तों से मुलाकात की। अजीजपुर की घटना से संबंधित सभी मामलों का निस्तार फास्ट टैªक कोर्ट से कराकर दोषियों को सजा देंगे। कम से कम समय में दोषियों को सजा दिलाने का इतिहास स्थापित करेंगे। जरूरत पड़ी तो सी0बी0आई0 से भी जाॅच करायेंगे। दोषी तत्व पाताल में भी होंगे तो उन्हें खोजकर सजा देंगे। घटना के दूसरे ही दिन पाॅच-पाॅच लाख रूपये का मुआवजा मृतकों के आश्रित को दिला दिया। हर्जाने की क्षतिपूर्ति करायी जायेगी, जले सामानों का मूल्यांकन कराकर जितनी क्षतिपूर्ति हुयी है, उसका क्षतिपूर्ति करायेंगे। अजीजपुर गाॅव में पुलिस थाना खुलवा रहे हैं। गाॅवों में पी0सी0सी0 सड़क, चापाकल, मदरसा सबकी व्यवस्था करेंगे और जो भी जरूरत होगी, उसे भी पूरा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अफवाह पर ध्यान न दें, बहरूपिया लोग यहाॅ आने लगे हैं। वह आपको भरमायेंगे। उनके जाल में कभी न फॅसें। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान ने सर्वधर्म सद्भाव की शिक्षा दी है, मगर आज मंदिर वहीं बनायेंगे, धारा 370 को समाप्त करेंगे, समान सिविल कोड को लागू कर हिन्दुस्तान की विभिन्नता में एकता की खुबसूरती को समाप्त करने की कोशिश हो रही है। हम इस कोशिश को जहाॅ भी रहें, विफल करें, अपनी एकता को बनाये रखें। आपसी प्रेम, सद्भाव के रिश्ते को मजबूत करें।
अमिर-ए-शरियत हजरत मौलाना निजामुद्दीन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि इनसान की फजीलत (बरतरी) तालिम की वजह से है। जिस कौम ने तालिम पर ध्यान दिया, वे आगे बढ़ी है और तरक्की की है। उन्होंने कहा कि आज अल्पसंख्यकों में तालिम के बारे में एहसास है। हर कोई चाहता है कि उनका बच्चा पढ़े। उन्होंने कहा कि जहाॅ पर तालिम के लिये बेहतर सुविधा न हो, उसे निशाना बनाकर वहाॅ पर बेहतर सुविधा सृजित की जाय। गाॅवों में लोअर प्राइमरी स्कूल से मिडिल स्कूल तक की शिक्षा का प्रबंध जरूर होना चाहिये। योजनाओं को कागज से जमीन पर उतारने की जरूरत है। तालिम के लिये जो जरूरत हो, उसे पूरा किया जाय। जो कौम तालिम एवं सेहत के ऐतबार से तरक्की करोगी, वही कौम सेहतमंद रहेगी। अमन, इंसाफ हो, लोगों को रोजगार मिले, भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल जाय तो मूल्क एवं राज्य को तरक्की से नहीं रोका जा सकता है। अमन कायम रखें, भाईचारा कायम रहे, तालिम, सेहत, रोजगार और अमन ओ शांति के लिये काम किया जाय। तालिम के साथ तरबियत जरूर सीखाया जाय।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री वृशिण पटेल, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री श्री शाहिद अली खाॅ ने भी समारोह को संबोधित किया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, शांति एवं सुशासन के लिये सरकार के द्वारा उठाये गये कदमों की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर नायब अमिर -ए-शरियत मौलाना सैयद वलीरहमानी, नाजिम इमारत-ए-शरिया श्री अनिसुर्रहमान कासमी, कुलपति मौलाना मजहरूलहक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय डाॅ0 एजाज अली अरसद, निदेशक उच्च शिक्षा श्री एस0एम0 करीम, प्रो0 शकील अहमद कासमी, काजी निसार अहमद कासमी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।