पटना, 29 जनवरी 2015:- राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी ने बिहार को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना इसके लिए बिहारवासी अनुग्रहित हैं। महात्मा गाॅधी ने अफ्रीका जाकर काम किया। जब लौटे तो यहाॅ आकर सामान्य वर्ग की पीड़ा को देखा और उससे कैसे निजात दिलाया जाए इसके लिए संघर्ष किया। मुख्यमंत्री श्री जीतन राम मांझी आज भारतीय नृत्यकला मंदिर में राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी के दक्षिण अफ्रीका से वापसी के 100वें वर्ष गांठ के उपलक्ष्य में कला एवं संस्कृति विभाग एवं बिहार ललित कला एकैडमी के संयुक्त तवाधान में राष्ट्रपिता बापू की याद में ‘‘बापू पेंटिंग एवं प्रदर्षनी’’ का लोकार्पण कर रहे थे।
कला एवं डाक टिकट प्रदर्षनी के माध्यम से महात्मा गाॅधी की जीवनी को प्रस्तुत किए जाने के लिए मुख्यमंत्री ने कला एवं संस्कृति विभाग की प्रशंसा की और कहा कि यह अनूठी प्रदर्षनी हमें गाॅधी जी की महत्वपूर्ण घटनाओं, अध्यात्मिक, दार्षनिक तŸवों और लोकप्रिय पुनरावलोकन जो उन्हें महात्मा बनाती है से परिचित कराएगी। आधुनिक युग में जहाॅ धर्म जाति एवं समुदाय के नाम पर हिंसा से लाखों निर्दोष लोगों की जान जा रही है एवं युवा, मासूम को आतंकवाद की ओर ढकेला जा रहा है ऐसे में हमे महात्मा गाॅधी के अहिंसा और सत्याग्राह के मार्ग की जरूरत है। यह प्रदर्षनी महात्मा गाॅधी द्वारा दिखाये गए मानव अधिकारों के मूल्य और स्वतंत्रता पर जोर देने की कोषिष करेगी। उन्होंने कहा कि संसार गाॅधी दर्षन से अनुप्राणित है इसे अपनाने और जीवन में उताड़ने की जरूरत है। राष्ट्रपिता का नाम हम हर काम में ले रहे हैं, मगर जिन मूल्यों के लिए उन्होंने संर्घष किया, अत्याचार के विरूद्ध खड़े हुए, अहिंसा का सहारा लेकर आन्दोलन किया। हम उनका नाम तो लेते हैं मगर उनकी बातों पर कितना अमल करते हैं इसे विचारने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समाचार पत्र में धर्मनिर्पेक्ष और सामाजवादी शब्दों को हटाये जाने की एक दल विषेष द्वारा की गई मांग पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी मांगे उचित नहीं है। महात्मा गाॅधी ने सब को सुम्मति देने की बात कही है। राष्ट्रपिता को ठीक ढंग से समझने की जरूरत है। गरीबों के उत्थान के लिए उन्होंने शहादत दी थी, धर्मनिर्पेक्षता की बात की थी, उन्होंने हिन्दु राज की बात नहीं की थी, गरीब अमीर के बीच खाई का पटने की बात कही थी। धार्मिक्ता, जातिवाद, भाषावाद की परिधि से हट कर मानवता की बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गाॅधीजी के विभिन्न आयामों को प्रदर्षित करने का काम प्रदर्षनी के माध्यम से किया गया है, यह सराहनीय है। राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी और बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर के बीच कोई अलगाव नहीं था। रास्ते अलग हो सकते हैं मगर दोनों की मंजिल एक थी। वे भंगी बस्ती को ठीक करने का उपाय करते थे। अनुसूचित जाति-जनजाति के उत्थान के लिए कार्य करते थे। महात्मा गाॅधी उस समय से आज ज्यादा प्रसंगिक हो गए हैं। वे जो बात बोलते थे उसका उपयोग अपने व्यवहारिक जीवन में करते थे ऐसे महान आत्मा के चरणों में मस्तक झुकाते हैं।
समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी के परपोत्र श्री तुषार गाॅधी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन दो लोगो को हाल ही में नाॅवेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है उन्होंने ने कहा है कि उन्होंने बापू से प्रेरण ली जबकि उन दोनो का जन्म बापू की मृत्यु के बाद हुआ है। बापू के सपने को आम जनो तक पहुॅचाने के लिए इसी तरह के आयोजन लगातार किए जाए, ऐसा आयोजन की जरूरत है। बिहार के साथ बापू का जुड़ाव बहुत अहमियत रखता है। उन्होने राष्ट्रपिता के चंपारण सत्याग्रह का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे एक भिखारी ने मिलकर उनके सत्याग्रह आन्दोलन के लिए कुछ देने की इच्छा व्यक्त की तो राष्ट्रपिता ने उसका स्वागत किया और उस भिखारी के साढ़े तीन आने के अंषदान को स्वीकार किया। जब उनसे पूछा गया तो उन्होने कहा कि इस निर्धन व्यक्ति द्वारा दिया गया साढ़े तीन आने का दान बिरलाजी के द्वारा दिए गए एक लाख रुपये के दान से अधिक महत्व रखता है। राष्ट्रपिता की जन्म भूमि गुजरात थी जबकि उनकी कर्मभूमि बिहार थी।
समारोह को कला एवं संस्कृति मंत्री श्री विनय बिहारी ने भी संबोधित किया, स्वागत भाषण सचिव कला संस्कृति श्री आनन्द किषोर ने किया और कहा कि इस प्रदर्षनी के माध्यम से राष्ट्रपिता के संघर्ष एवं जीवन के विविध पहलूओं को दर्षाया गया है। प्रदर्षनी पाॅच दिनों तक चलेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध कलाकार श्री श्याम शर्मा की पेंटिंग पर आधारित प्रदर्शनी ‘‘गाॅधी: समय का सच’’ का लोकार्पण किया और कहा कि श्री श्याम शर्मा ने गाॅधी जी की जीवनी से प्रभावित होकर पेंटिंग की श्रृंखला बनायी है जो पूरी तरह कलात्मक अभिव्यक्ति है। उन्होंने एक-एक पादर्श को गहराई से अवलोकन किया और कहा कि श्री श्याम शर्मा का प्रयास अद्भुत है। उन्होंने बिहार की धरोहर, सांस्कृति, कला साहित्य एवं महापुरूषों को डाक टिकटों में चित्रित करने के लिए डाक तार विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे देश गौरवान्वित हुआ है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिह्न भेट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बिहार ललित कला एकैडमी के अध्यक्ष श्री ए0पी0 बादल, साहित्कार आलोक धनुवा सहित अनेकों गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कला एवं डाक टिकट प्रदर्षनी के माध्यम से महात्मा गाॅधी की जीवनी को प्रस्तुत किए जाने के लिए मुख्यमंत्री ने कला एवं संस्कृति विभाग की प्रशंसा की और कहा कि यह अनूठी प्रदर्षनी हमें गाॅधी जी की महत्वपूर्ण घटनाओं, अध्यात्मिक, दार्षनिक तŸवों और लोकप्रिय पुनरावलोकन जो उन्हें महात्मा बनाती है से परिचित कराएगी। आधुनिक युग में जहाॅ धर्म जाति एवं समुदाय के नाम पर हिंसा से लाखों निर्दोष लोगों की जान जा रही है एवं युवा, मासूम को आतंकवाद की ओर ढकेला जा रहा है ऐसे में हमे महात्मा गाॅधी के अहिंसा और सत्याग्राह के मार्ग की जरूरत है। यह प्रदर्षनी महात्मा गाॅधी द्वारा दिखाये गए मानव अधिकारों के मूल्य और स्वतंत्रता पर जोर देने की कोषिष करेगी। उन्होंने कहा कि संसार गाॅधी दर्षन से अनुप्राणित है इसे अपनाने और जीवन में उताड़ने की जरूरत है। राष्ट्रपिता का नाम हम हर काम में ले रहे हैं, मगर जिन मूल्यों के लिए उन्होंने संर्घष किया, अत्याचार के विरूद्ध खड़े हुए, अहिंसा का सहारा लेकर आन्दोलन किया। हम उनका नाम तो लेते हैं मगर उनकी बातों पर कितना अमल करते हैं इसे विचारने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समाचार पत्र में धर्मनिर्पेक्ष और सामाजवादी शब्दों को हटाये जाने की एक दल विषेष द्वारा की गई मांग पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी मांगे उचित नहीं है। महात्मा गाॅधी ने सब को सुम्मति देने की बात कही है। राष्ट्रपिता को ठीक ढंग से समझने की जरूरत है। गरीबों के उत्थान के लिए उन्होंने शहादत दी थी, धर्मनिर्पेक्षता की बात की थी, उन्होंने हिन्दु राज की बात नहीं की थी, गरीब अमीर के बीच खाई का पटने की बात कही थी। धार्मिक्ता, जातिवाद, भाषावाद की परिधि से हट कर मानवता की बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गाॅधीजी के विभिन्न आयामों को प्रदर्षित करने का काम प्रदर्षनी के माध्यम से किया गया है, यह सराहनीय है। राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी और बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर के बीच कोई अलगाव नहीं था। रास्ते अलग हो सकते हैं मगर दोनों की मंजिल एक थी। वे भंगी बस्ती को ठीक करने का उपाय करते थे। अनुसूचित जाति-जनजाति के उत्थान के लिए कार्य करते थे। महात्मा गाॅधी उस समय से आज ज्यादा प्रसंगिक हो गए हैं। वे जो बात बोलते थे उसका उपयोग अपने व्यवहारिक जीवन में करते थे ऐसे महान आत्मा के चरणों में मस्तक झुकाते हैं।
समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी के परपोत्र श्री तुषार गाॅधी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन दो लोगो को हाल ही में नाॅवेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है उन्होंने ने कहा है कि उन्होंने बापू से प्रेरण ली जबकि उन दोनो का जन्म बापू की मृत्यु के बाद हुआ है। बापू के सपने को आम जनो तक पहुॅचाने के लिए इसी तरह के आयोजन लगातार किए जाए, ऐसा आयोजन की जरूरत है। बिहार के साथ बापू का जुड़ाव बहुत अहमियत रखता है। उन्होने राष्ट्रपिता के चंपारण सत्याग्रह का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे एक भिखारी ने मिलकर उनके सत्याग्रह आन्दोलन के लिए कुछ देने की इच्छा व्यक्त की तो राष्ट्रपिता ने उसका स्वागत किया और उस भिखारी के साढ़े तीन आने के अंषदान को स्वीकार किया। जब उनसे पूछा गया तो उन्होने कहा कि इस निर्धन व्यक्ति द्वारा दिया गया साढ़े तीन आने का दान बिरलाजी के द्वारा दिए गए एक लाख रुपये के दान से अधिक महत्व रखता है। राष्ट्रपिता की जन्म भूमि गुजरात थी जबकि उनकी कर्मभूमि बिहार थी।
समारोह को कला एवं संस्कृति मंत्री श्री विनय बिहारी ने भी संबोधित किया, स्वागत भाषण सचिव कला संस्कृति श्री आनन्द किषोर ने किया और कहा कि इस प्रदर्षनी के माध्यम से राष्ट्रपिता के संघर्ष एवं जीवन के विविध पहलूओं को दर्षाया गया है। प्रदर्षनी पाॅच दिनों तक चलेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध कलाकार श्री श्याम शर्मा की पेंटिंग पर आधारित प्रदर्शनी ‘‘गाॅधी: समय का सच’’ का लोकार्पण किया और कहा कि श्री श्याम शर्मा ने गाॅधी जी की जीवनी से प्रभावित होकर पेंटिंग की श्रृंखला बनायी है जो पूरी तरह कलात्मक अभिव्यक्ति है। उन्होंने एक-एक पादर्श को गहराई से अवलोकन किया और कहा कि श्री श्याम शर्मा का प्रयास अद्भुत है। उन्होंने बिहार की धरोहर, सांस्कृति, कला साहित्य एवं महापुरूषों को डाक टिकटों में चित्रित करने के लिए डाक तार विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे देश गौरवान्वित हुआ है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिह्न भेट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बिहार ललित कला एकैडमी के अध्यक्ष श्री ए0पी0 बादल, साहित्कार आलोक धनुवा सहित अनेकों गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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