पटना, 03 अप्रील 2015:- संसदीय प्रणाली की जानकारी सहज रूप से दी जानी चाहिये ताकि लोगों की इसमें दिलचस्पी और अभिरूचि पैदा हो। मनुष्य की प्रवृति सीखने की होती है। अनुभव से ज्यादा बड़ी शिक्षा नहीं होती है। संसदीय प्रणाली दुनिया में कैसे चल रही है, इन सब बातों के लिये शोध की जरूरत है। जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान को संस्थान के रूप में ही विकसित करना चाहिये। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान में नवनिर्मित सभागार का उद्घाटन करते हुये समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान को पुनर्जीवित करने की कोशिश हो रही है। अब यह काम प्रारंभ हो रहा है। छोटा सा सभागार श्री श्रीकान्त जी के पहल पर यहाॅ बना है। यह संस्थान की गतिविधि को बढ़ाने में अहम भूमिका निभायेगी। संस्थान के नाम के अनुसार यहाॅ पर काम हो, अब संस्थान में काम करने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री श्रीकान्त जी का लंबा अनुभव पत्रकारिता एवं शोध के क्षेत्र में रहा है। बिहार में जितने आन्दोलन हुये हैं या आजादी की लड़ाई में बिहारवासियों की जो भूमिका रही है, उसकी उतनी चर्चा नहीं हुयी है, जितनी होनी चाहिये थी। श्री श्रीकान्त जी की दिलचस्पी आन्दोलनों, विचारों के शोध में रही है। इस संस्थान के जरिये संसदीय प्रणाली जो बेहतरीन प्रणाली है, उसके विभिन्न आयामों का शोध इस संस्थान के माध्यम से किया जा सकता है। संसदीय प्रणाली की जानकारी किस प्रकार आज के विधायकों को हम सहज रूप से किस प्रकार दे पायेंगे, इस पर भी सोंच (शोध) की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा में स्तरीय बड़ा लाइब्रेरी है, विधानसभा के नये भवन बनने के बाद इस पुस्तकालय की उपयोगिता को और बढ़ाने पर ध्यान दिया जायेगा। संसद में भी संसदीय प्रणाली की ज्यादा जानकारियाॅ हैं। किताबें तो मिल जाती हैं, मगर इनको पढ़कर समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों को अलग-अलग ढ़ंग से आकृष्ट करना पड़ेगा। अनेक लोगों ने बहुत सारे काम किये हैं, उनको इस संस्थान से जोडि़ये। देश एवं दुनिया में जो कुछ हो रहा है, उसके बारे में साधारण जानकारी का संग्रह करें। बिहार की स्थिति, बिहार के गौरवपूर्ण ऐतिहासिक जमीन के स्थिति के बारे में जानकारी दे सकते हैं। आजादी के बाद अनेक आन्दोलन हुये, अलग-अलग इलाके में इसका क्या प्रभाव पड़ा, लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन के संबंध में भी शोध कार्य कर सकते हैं। आपलोगों की सहायता कर सकते हैं, आपके यहाॅ से जो इन्फाॅरमेशन जाये, उसमें विश्वसनीयता होनी चाहिये। आपके यहाॅ से जो इन्फाॅरमेशन मिले और उसकी ब्रांडिंग रहे तो लोगों में इसके प्रति विश्वसनीयता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान लेागों से परामर्श लेकर अपनी कार्ययोजना बनाये। संस्थान बना है तो इसके लिये इन्हें आर्थिक अधिकार भी देना होगा। नाम के अनुरूप संस्थान काम करे, आद्री से भी संस्थान को सीख लेनी चाहिये। सबसे बड़ा पहलू शोध का है, इसका लाभ मिलना चाहिये। उन्होंने कहा कि बिहार में अभी मात्र दो संस्थान- ए0एन0 इन्स्टीच्यूट एवं आद्री शोध कार्य में लगी हुयी है। तीसरे शोध संस्थान के रूप में जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिये। मुख्यमंत्री ने सलाह दी कि जगजीवन राम - ए बायोग्राफी पुस्तक का हिन्दी अनुवाद भी किया जाना चाहिये। यह संस्थान अनुवाद के क्षेत्र में भी विशिष्टता हासिल कर ले, मेरी ऐसी कामना है। संस्थान के लिये हर समय मेरा सहयोग रहेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रो0 नलीन विलोचन शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक जगजीवन राम- ए बायोग्राफी का लोकार्पण भी किया।
समारोह को विधान पार्षद प्रो0 रामवचन राय, आद्री के सदस्य सचिव श्री शैवाल गुप्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती निरजा चैधरी ने भी संबोधित किया तथा जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के कार्यकलापों पर विस्तार से चर्चा की और आशा व्यक्त किया कि ये संस्थान आने वाले दिनों में अपनी पहचान शोध के क्षेत्र में स्थापित करेगा।
समारोह की अध्यक्षता जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के निदेशक श्री श्रीकान्त ने किया और संस्थान के बढ़ते कदम एवं संस्थान के भविष्य की रूप रेखा को प्रस्तुत किया। श्री श्रीकान्त ने बताया कि इस संस्था के इतिहास में आज का दिन महत्वपूर्ण दिन है, जबकि किसी राज्य के मुख्यमंत्री का पदार्पण यहाॅ हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को संस्थान में आने के लिये संस्थान की ओर से आभार व्यक्त किया तथा उनका अभिनंदन एवं स्वागत किया।
इस अवसर पर खाद्य उपभोक्ता मंत्री श्री श्याम रजक, भवन निर्माण मंत्री श्री दामोदर रावत, प्रधान सचिव शिक्षा श्री आर0के0 महाजन, मुख्यमंत्री के सचिव श्री चंचल कुमार, उच्च शिक्षा निदेशक श्री एस0एम0 करीम, साहित्यकार श्री आलोक धनुआ, किसान आयोग के अध्यक्ष डाॅ0 सी0पी0 सिन्हा, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता श्रीमती कंचन माला चैधरी, श्री प्रेम कुमार मणि सहित अनेक सामाजिक एवं साहित्य हस्तियाॅ उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान को पुनर्जीवित करने की कोशिश हो रही है। अब यह काम प्रारंभ हो रहा है। छोटा सा सभागार श्री श्रीकान्त जी के पहल पर यहाॅ बना है। यह संस्थान की गतिविधि को बढ़ाने में अहम भूमिका निभायेगी। संस्थान के नाम के अनुसार यहाॅ पर काम हो, अब संस्थान में काम करने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री श्रीकान्त जी का लंबा अनुभव पत्रकारिता एवं शोध के क्षेत्र में रहा है। बिहार में जितने आन्दोलन हुये हैं या आजादी की लड़ाई में बिहारवासियों की जो भूमिका रही है, उसकी उतनी चर्चा नहीं हुयी है, जितनी होनी चाहिये थी। श्री श्रीकान्त जी की दिलचस्पी आन्दोलनों, विचारों के शोध में रही है। इस संस्थान के जरिये संसदीय प्रणाली जो बेहतरीन प्रणाली है, उसके विभिन्न आयामों का शोध इस संस्थान के माध्यम से किया जा सकता है। संसदीय प्रणाली की जानकारी किस प्रकार आज के विधायकों को हम सहज रूप से किस प्रकार दे पायेंगे, इस पर भी सोंच (शोध) की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा में स्तरीय बड़ा लाइब्रेरी है, विधानसभा के नये भवन बनने के बाद इस पुस्तकालय की उपयोगिता को और बढ़ाने पर ध्यान दिया जायेगा। संसद में भी संसदीय प्रणाली की ज्यादा जानकारियाॅ हैं। किताबें तो मिल जाती हैं, मगर इनको पढ़कर समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों को अलग-अलग ढ़ंग से आकृष्ट करना पड़ेगा। अनेक लोगों ने बहुत सारे काम किये हैं, उनको इस संस्थान से जोडि़ये। देश एवं दुनिया में जो कुछ हो रहा है, उसके बारे में साधारण जानकारी का संग्रह करें। बिहार की स्थिति, बिहार के गौरवपूर्ण ऐतिहासिक जमीन के स्थिति के बारे में जानकारी दे सकते हैं। आजादी के बाद अनेक आन्दोलन हुये, अलग-अलग इलाके में इसका क्या प्रभाव पड़ा, लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन के संबंध में भी शोध कार्य कर सकते हैं। आपलोगों की सहायता कर सकते हैं, आपके यहाॅ से जो इन्फाॅरमेशन जाये, उसमें विश्वसनीयता होनी चाहिये। आपके यहाॅ से जो इन्फाॅरमेशन मिले और उसकी ब्रांडिंग रहे तो लोगों में इसके प्रति विश्वसनीयता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान लेागों से परामर्श लेकर अपनी कार्ययोजना बनाये। संस्थान बना है तो इसके लिये इन्हें आर्थिक अधिकार भी देना होगा। नाम के अनुरूप संस्थान काम करे, आद्री से भी संस्थान को सीख लेनी चाहिये। सबसे बड़ा पहलू शोध का है, इसका लाभ मिलना चाहिये। उन्होंने कहा कि बिहार में अभी मात्र दो संस्थान- ए0एन0 इन्स्टीच्यूट एवं आद्री शोध कार्य में लगी हुयी है। तीसरे शोध संस्थान के रूप में जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिये। मुख्यमंत्री ने सलाह दी कि जगजीवन राम - ए बायोग्राफी पुस्तक का हिन्दी अनुवाद भी किया जाना चाहिये। यह संस्थान अनुवाद के क्षेत्र में भी विशिष्टता हासिल कर ले, मेरी ऐसी कामना है। संस्थान के लिये हर समय मेरा सहयोग रहेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रो0 नलीन विलोचन शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक जगजीवन राम- ए बायोग्राफी का लोकार्पण भी किया।
समारोह को विधान पार्षद प्रो0 रामवचन राय, आद्री के सदस्य सचिव श्री शैवाल गुप्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती निरजा चैधरी ने भी संबोधित किया तथा जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के कार्यकलापों पर विस्तार से चर्चा की और आशा व्यक्त किया कि ये संस्थान आने वाले दिनों में अपनी पहचान शोध के क्षेत्र में स्थापित करेगा।
समारोह की अध्यक्षता जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के निदेशक श्री श्रीकान्त ने किया और संस्थान के बढ़ते कदम एवं संस्थान के भविष्य की रूप रेखा को प्रस्तुत किया। श्री श्रीकान्त ने बताया कि इस संस्था के इतिहास में आज का दिन महत्वपूर्ण दिन है, जबकि किसी राज्य के मुख्यमंत्री का पदार्पण यहाॅ हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को संस्थान में आने के लिये संस्थान की ओर से आभार व्यक्त किया तथा उनका अभिनंदन एवं स्वागत किया।
इस अवसर पर खाद्य उपभोक्ता मंत्री श्री श्याम रजक, भवन निर्माण मंत्री श्री दामोदर रावत, प्रधान सचिव शिक्षा श्री आर0के0 महाजन, मुख्यमंत्री के सचिव श्री चंचल कुमार, उच्च शिक्षा निदेशक श्री एस0एम0 करीम, साहित्यकार श्री आलोक धनुआ, किसान आयोग के अध्यक्ष डाॅ0 सी0पी0 सिन्हा, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता श्रीमती कंचन माला चैधरी, श्री प्रेम कुमार मणि सहित अनेक सामाजिक एवं साहित्य हस्तियाॅ उपस्थित थे।
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