पटना, 16 अप्रैल 2015:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज बिहार विधान परिषद के उपसभागार में झारखण्ड के संसदीय कार्य मंत्री श्री सरयु राय के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि श्री सरयु राय के लिये मंत्री पद बड़ा नहीं है। वे बौद्धिक एवं राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में झारखण्ड के महत्वपूर्ण हस्ती हैं। यह झारखण्ड के लिये सौभाग्य की बात है कि इनकी योग्यता एवं क्षमता का उपयोग होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं बिहार विधान परिषद के सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह को बधाई देता हूॅ कि इन्होंने एक अच्छी परंपरा की शुरूआत की है। श्री सरयु राय 1998 से 2004 तक झारखण्ड क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे। संसदीय कार्य मंत्री के पूर्व वे 2005 से 2009 तक झारखण्ड विधानसभा के सदस्य रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री सरयु राय के प्रयास से ही बिहार के विभाजन होने के बाद हम सब लोग प्रयत्नशील रहे कि विधान परिषद के निवार्चित सदस्यों की सदस्यता समाप्त नहीं होनी चाहिये। जब तक अवधि है, सदस्यता बरकरार रहनी चाहिये। बिहार का पुनर्गठन होने पर वे झारखण्ड गये। अपनी काबिलियत एवं योग्यता से झारखण्ड की सेवा कर रहे हैं। झारखण्ड के समस्याओं का समाधान एवं विकास के लिये आगे भी कार्य करते रहेंगे। इन्होंने सोन अंचल किसान संघर्ष समिति के संयोजक के रूप में मध्यप्रदेश, उतर प्रदेश एवं बिहार के बीच हुये वाणसागर समझौता के खिलाफ एवं सोन नदी पर पानी के हक के लिये किसान संघर्ष का शंखनाद किया। वाणसागर समझौता में बिहार के हक की अवहेलना की गयी। ये पटना हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़ते रहे। आज से 21 साल पहले बिहार के आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र तैयार की गयी। उसके लेखक श्री सरयु राय जी ही थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों से इनका संबंध बहुत पुराना है। ये भाजपा के साथ इनका स्वाभाविक लगाव है। पार्टी की परिधि के बाहर सार्वजनिक हित में ये सामूहिक भूमिका निभाते रहे हैं। बिहार से झारखण्ड अलग होने के बाद ये झारखण्ड के ही होकर रह गये। जिस समय झारखण्ड का निर्माण हुआ, उस समय झारखण्ड के आन्दोलन में आवेग नहीं बचा था। वैसे बिहार के लोग जिन्होंने झारखण्ड को अपना लिया, वे झारखण्ड सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में यह धारणा प्रचलित थी कि अगर झारखण्ड अलग हो जायेगा तो बिहार में बचेगा क्या। झारखण्ड के निर्माण के बाद बिहार में मायूसी का माहौल था, जबकि झारखण्ड में उत्सव का माहौल था। हमने शुरू से ही कहा है कि बिहार में बहुत कुछ है। बिहार में अपार संभावनायें हैं। खान एवं खदान भले ही झारखण्ड चला गया हो लेकिन हमारी विरासत बोधगया, नालंदा, वैशाली, राजगीर एवं अन्य महत्वपूर्ण विरासत हमारे पास है। 2000 में बने झारखण्ड की मायूसी को आज लोग भूल गये हैं। पन्द्रह वर्षों में लोगों को अब यह भी याद नहीं है कि झारखण्ड बिहार का हिस्सा था। आज बिहार में एक लाख बीस हजार करोड़ रूपये का बजट साइज है। झारखण्ड के पास सरप्लस राशि था। झारखण्ड ने रेलवे प्रोजेक्ट में अपना दो तिहाई धन लगा दिया। झारखण्ड आगे बढ़ रहा है, आगे बढ़े। झारखण्ड में रिर्सोस की कमी नहीं है। बिहार भी आज बेहतर स्थिति में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन के पन्द्रह साल बाद भी आज बहुत सारे मुद्दे हैं, जिनका समाधान होना जरूरी है। श्री सरयु राय जी को इन मुद्दों की जानकारी है। वे अपनी योग्यता एवं क्षमता से इसमें समाधान करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि हमलोगों की पूरी शुभकामनायें श्री सरयु राय जी के साथ है। वे राजनीति में एक सितारे के रूप में चमकते रहें, इनका भविष्य उज्ज्वल हो।
सभापति बिहार विधान परिषद श्री अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि झारखण्ड बॅटवारे में श्री सरयु राय झारखण्ड चले गये। हम झारखण्ड से बिहार आ गये। 1998 में ये झारखण्ड क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के सदस्य बने। हमलोगों के प्रयास से और गृह मंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी एवं श्री नीतीश कुमार जी के सहयोग से निवार्चित सदस्यों की सदस्यता बिहार विभाजन के बाद बनी रही। श्री सरयु राय झारखण्ड चले गये। हमने कहा कि हम सता के गोद में न जाकर माता की गोद में जायेंगे। श्री सरयु राय बात कम करते हैं, काम ज्यादा करते हैं। कृषि एवं नहर योजना तथा पईन का इन्हें गहरा अध्ययन है। इनका जीवन दाग रहित हो और ये आगे बढ़ते रहें।
मंत्री संसदीय कार्य झारखण्ड सरकार श्री सरयु राय ने कहा कि मंत्री बनने के बाद अगर हमें यह सम्मान मिला है तो हम 2000 में ही झारखण्ड में मंत्री बन गये रहते। मैं मंत्री नहीं बनना चाहता था। राजनीति में एक बार गाड़ी छुटती है तो कब पकड़ाती है पता नहीं। बिहार विधान परिषद के सभापति श्री अवधेश बाबू, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार एवं सभी मित्रों के आग्रह से मैं अभिनंदन समारोह में उपस्थित हुआ हूॅ। मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूॅ। उन्होंने कहा कि अभिनंदन एवं श्रद्धांजलि में बहुत बारिक अंतर है। श्रद्धांजलि में कहा जाता है कि वे थे और अभिनंदन में कहा जाता है कि हैं। मैं अपने मित्रगणों एवं शुभचिन्तकों से मिलने का अवसर गंवाना नहीं चाहता था, मैं आप सभी का आभार व्यक्त करता हूॅ। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में हम राष्ट्रीय स्वयं सेवक के साथ जुड़े हुये थे। बाद में पत्रकारिता से जुड़ गये। नीतीश जी के कारण ही दुबारा राजनीति में सक्रिय हुआ।
मंत्री संसदीय कार्य झारखण्ड सरकार श्री सरयु राय ने कहा कि दुबारा राजनीति में सक्रिय रहा, इसका मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की बहुत बड़ी भूमिका है। बिहार विधान परिषद ही मेरे संसदीय जीवन का पहला पड़ाव है। बिहार विधान परिषद में आने के लिये अन्य दलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने कहा कि मतभेद हुआ, फिर मिले तो यह दिल का रिश्ता माना जाता है। अगर मतभेद न हो तो यह मस्तिष्क का रिश्ता माना जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार मेरी जन्मभूमि है। झारखण्ड मेरा कर्मभूमि है। झारखण्ड में रहने वाला हर व्यक्ति जब अपने आपको झारखण्ड का नहीं समझेगा, तब तक झारखण्ड का विकास नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि झारखण्ड में कोई ऐसा मुद्दा नहीं उठेगा, जिससे बिहार के हितों पर आंच आये और बिहार में कोई ऐसा मुद्दा नहीं उठेगा, जिससे झारखण्ड के हितों पर आंच आये। दोनों राज्यों के बीच में स्नेह का अच्छा संबंध है।
इस अवसर पर सदस्य बिहार विधान परिषद श्री हरेन्द्र प्रताप पाण्डेय, सदस्य बिहार विधान परिषद श्री केदार नाथ पाण्डेय, सदस्य बिहार विधान परिषद श्री मदन मोहन झा, सदस्य बिहार विधान परिषद श्री रजनीश कुमार ने भी सभा को सारगर्भित ढ़ंग से संबोधित किया। इस अवसर पर उप सभापति बिहार विधान परिषद श्री सलिम परवेज ने मुख्यमंत्री को पुष्प-गुच्छ भेंटकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने मंत्री संसदीय कार्य झारखण्ड श्री सरयु राय को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। सभापति बिहार विधान परिषद श्री अवधेश नारायण सिंह ने मंत्री झारखण्ड श्री सरयु राय को प्रशस्ति पत्र देकर एवं शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मंच का संचालन श्री रामप्रवेश राय ने किया, धन्यवाद ज्ञापन उप सभापति बिहार विधान परिषद श्री सलिम परवेज ने किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं बिहार विधान परिषद के सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह को बधाई देता हूॅ कि इन्होंने एक अच्छी परंपरा की शुरूआत की है। श्री सरयु राय 1998 से 2004 तक झारखण्ड क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे। संसदीय कार्य मंत्री के पूर्व वे 2005 से 2009 तक झारखण्ड विधानसभा के सदस्य रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री सरयु राय के प्रयास से ही बिहार के विभाजन होने के बाद हम सब लोग प्रयत्नशील रहे कि विधान परिषद के निवार्चित सदस्यों की सदस्यता समाप्त नहीं होनी चाहिये। जब तक अवधि है, सदस्यता बरकरार रहनी चाहिये। बिहार का पुनर्गठन होने पर वे झारखण्ड गये। अपनी काबिलियत एवं योग्यता से झारखण्ड की सेवा कर रहे हैं। झारखण्ड के समस्याओं का समाधान एवं विकास के लिये आगे भी कार्य करते रहेंगे। इन्होंने सोन अंचल किसान संघर्ष समिति के संयोजक के रूप में मध्यप्रदेश, उतर प्रदेश एवं बिहार के बीच हुये वाणसागर समझौता के खिलाफ एवं सोन नदी पर पानी के हक के लिये किसान संघर्ष का शंखनाद किया। वाणसागर समझौता में बिहार के हक की अवहेलना की गयी। ये पटना हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़ते रहे। आज से 21 साल पहले बिहार के आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र तैयार की गयी। उसके लेखक श्री सरयु राय जी ही थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों से इनका संबंध बहुत पुराना है। ये भाजपा के साथ इनका स्वाभाविक लगाव है। पार्टी की परिधि के बाहर सार्वजनिक हित में ये सामूहिक भूमिका निभाते रहे हैं। बिहार से झारखण्ड अलग होने के बाद ये झारखण्ड के ही होकर रह गये। जिस समय झारखण्ड का निर्माण हुआ, उस समय झारखण्ड के आन्दोलन में आवेग नहीं बचा था। वैसे बिहार के लोग जिन्होंने झारखण्ड को अपना लिया, वे झारखण्ड सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में यह धारणा प्रचलित थी कि अगर झारखण्ड अलग हो जायेगा तो बिहार में बचेगा क्या। झारखण्ड के निर्माण के बाद बिहार में मायूसी का माहौल था, जबकि झारखण्ड में उत्सव का माहौल था। हमने शुरू से ही कहा है कि बिहार में बहुत कुछ है। बिहार में अपार संभावनायें हैं। खान एवं खदान भले ही झारखण्ड चला गया हो लेकिन हमारी विरासत बोधगया, नालंदा, वैशाली, राजगीर एवं अन्य महत्वपूर्ण विरासत हमारे पास है। 2000 में बने झारखण्ड की मायूसी को आज लोग भूल गये हैं। पन्द्रह वर्षों में लोगों को अब यह भी याद नहीं है कि झारखण्ड बिहार का हिस्सा था। आज बिहार में एक लाख बीस हजार करोड़ रूपये का बजट साइज है। झारखण्ड के पास सरप्लस राशि था। झारखण्ड ने रेलवे प्रोजेक्ट में अपना दो तिहाई धन लगा दिया। झारखण्ड आगे बढ़ रहा है, आगे बढ़े। झारखण्ड में रिर्सोस की कमी नहीं है। बिहार भी आज बेहतर स्थिति में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन के पन्द्रह साल बाद भी आज बहुत सारे मुद्दे हैं, जिनका समाधान होना जरूरी है। श्री सरयु राय जी को इन मुद्दों की जानकारी है। वे अपनी योग्यता एवं क्षमता से इसमें समाधान करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि हमलोगों की पूरी शुभकामनायें श्री सरयु राय जी के साथ है। वे राजनीति में एक सितारे के रूप में चमकते रहें, इनका भविष्य उज्ज्वल हो।
सभापति बिहार विधान परिषद श्री अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि झारखण्ड बॅटवारे में श्री सरयु राय झारखण्ड चले गये। हम झारखण्ड से बिहार आ गये। 1998 में ये झारखण्ड क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के सदस्य बने। हमलोगों के प्रयास से और गृह मंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी एवं श्री नीतीश कुमार जी के सहयोग से निवार्चित सदस्यों की सदस्यता बिहार विभाजन के बाद बनी रही। श्री सरयु राय झारखण्ड चले गये। हमने कहा कि हम सता के गोद में न जाकर माता की गोद में जायेंगे। श्री सरयु राय बात कम करते हैं, काम ज्यादा करते हैं। कृषि एवं नहर योजना तथा पईन का इन्हें गहरा अध्ययन है। इनका जीवन दाग रहित हो और ये आगे बढ़ते रहें।
मंत्री संसदीय कार्य झारखण्ड सरकार श्री सरयु राय ने कहा कि मंत्री बनने के बाद अगर हमें यह सम्मान मिला है तो हम 2000 में ही झारखण्ड में मंत्री बन गये रहते। मैं मंत्री नहीं बनना चाहता था। राजनीति में एक बार गाड़ी छुटती है तो कब पकड़ाती है पता नहीं। बिहार विधान परिषद के सभापति श्री अवधेश बाबू, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार एवं सभी मित्रों के आग्रह से मैं अभिनंदन समारोह में उपस्थित हुआ हूॅ। मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूॅ। उन्होंने कहा कि अभिनंदन एवं श्रद्धांजलि में बहुत बारिक अंतर है। श्रद्धांजलि में कहा जाता है कि वे थे और अभिनंदन में कहा जाता है कि हैं। मैं अपने मित्रगणों एवं शुभचिन्तकों से मिलने का अवसर गंवाना नहीं चाहता था, मैं आप सभी का आभार व्यक्त करता हूॅ। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में हम राष्ट्रीय स्वयं सेवक के साथ जुड़े हुये थे। बाद में पत्रकारिता से जुड़ गये। नीतीश जी के कारण ही दुबारा राजनीति में सक्रिय हुआ।
मंत्री संसदीय कार्य झारखण्ड सरकार श्री सरयु राय ने कहा कि दुबारा राजनीति में सक्रिय रहा, इसका मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की बहुत बड़ी भूमिका है। बिहार विधान परिषद ही मेरे संसदीय जीवन का पहला पड़ाव है। बिहार विधान परिषद में आने के लिये अन्य दलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने कहा कि मतभेद हुआ, फिर मिले तो यह दिल का रिश्ता माना जाता है। अगर मतभेद न हो तो यह मस्तिष्क का रिश्ता माना जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार मेरी जन्मभूमि है। झारखण्ड मेरा कर्मभूमि है। झारखण्ड में रहने वाला हर व्यक्ति जब अपने आपको झारखण्ड का नहीं समझेगा, तब तक झारखण्ड का विकास नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि झारखण्ड में कोई ऐसा मुद्दा नहीं उठेगा, जिससे बिहार के हितों पर आंच आये और बिहार में कोई ऐसा मुद्दा नहीं उठेगा, जिससे झारखण्ड के हितों पर आंच आये। दोनों राज्यों के बीच में स्नेह का अच्छा संबंध है।
इस अवसर पर सदस्य बिहार विधान परिषद श्री हरेन्द्र प्रताप पाण्डेय, सदस्य बिहार विधान परिषद श्री केदार नाथ पाण्डेय, सदस्य बिहार विधान परिषद श्री मदन मोहन झा, सदस्य बिहार विधान परिषद श्री रजनीश कुमार ने भी सभा को सारगर्भित ढ़ंग से संबोधित किया। इस अवसर पर उप सभापति बिहार विधान परिषद श्री सलिम परवेज ने मुख्यमंत्री को पुष्प-गुच्छ भेंटकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने मंत्री संसदीय कार्य झारखण्ड श्री सरयु राय को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। सभापति बिहार विधान परिषद श्री अवधेश नारायण सिंह ने मंत्री झारखण्ड श्री सरयु राय को प्रशस्ति पत्र देकर एवं शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मंच का संचालन श्री रामप्रवेश राय ने किया, धन्यवाद ज्ञापन उप सभापति बिहार विधान परिषद श्री सलिम परवेज ने किया।
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